अब मरीन ड्राइव में भी लगेगा पार्किंग का पैसा, लोगों में दिखी नाराजगी, बोले- फुटपाथ पर शुल्क वसूली गलत…

Raipur Marine Drive: तेलीबांधा तालाब (मरीन ड्राइव) के पाथवे क्षेत्र को पार्किंग स्थल घोषित किए जाने के बाद मॉर्निंग और ईवनिंग वॉक करने वालों में नाराजगी देखने को मिल रही है।

Jan 31, 2026 - 09:19
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अब मरीन ड्राइव में भी लगेगा पार्किंग का पैसा, लोगों में दिखी नाराजगी, बोले- फुटपाथ पर शुल्क वसूली गलत…

Raipur Marine Drive: छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर में नगर निगम के एक नए फैसले को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। तेलीबांधा तालाब (मरीन ड्राइव) के पाथवे क्षेत्र को पार्किंग स्थल घोषित किए जाने के बाद मॉर्निंग और ईवनिंग वॉक करने वालों में नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि पैदल चलने के लिए बने फुटपाथ को पार्किंग में बदलना अनुचित है।

Raipur Marine Drive: पार्किंग शुल्क तय, पाथवे पर वसूली का आरोप

नगर निगम द्वारा तेलीबांधा तालाब के पाथवे क्षेत्र में पार्किंग शुल्क निर्धारित किया गया है। नए नियम के तहत चार पहिया वाहनों के लिए 4 घंटे का शुल्क 20 रुपये और दोपहिया वाहनों के लिए 12 घंटे का शुल्क 10 रुपये तय किया गया है। इसके बाद से ही फुटपाथ को पार्किंग में तब्दील किए जाने को लेकर विरोध शुरू हो गया है। इस फैसले के खिलाफ तेलीबांधा तालाब परिसर में बैनर भी लगाए गए हैं।

मॉर्निंग वॉकर्स का विरोध, निगम पर सवाल

पार्किंग शुल्क वसूलने के फैसले को लेकर मॉर्निंग और ईवनिंग वॉक करने वाले श्यामलाल साहू, विनीत सहित अन्य लोगों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि नगर निगम के अधिकारी क्या इतने लापरवाह हैं कि पैदल चलने के लिए बने फुटपाथ पर पार्किंग शुल्क वसूलेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी निगम द्वारा इसी तरह का निर्णय लिया गया था, जिसे विरोध के बाद वापस लेना पड़ा था। लोगों ने सवाल उठाया कि क्या अब मॉर्निंग वॉक करने वालों से भी शुल्क लिया जाएगा।

निगम कमिश्नर बोले– जानकारी नहीं

इस पूरे मामले पर जब लल्लूराम डॉट कॉम की टीम ने नगर निगम आयुक्त विश्वदीप से बात की, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस निर्णय की जानकारी नहीं है। कमिश्नर के इस बयान के बाद निगम के आंतरिक समन्वय पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

2021 में भी हो चुका है ऐसा प्रयोग

उल्लेखनीय है कि जुलाई 2021 में भी नगर निगम ने तेलीबांधा तालाब घूमने आने वाले लोगों से पार्किंग शुल्क वसूलने का आदेश जारी किया था। हालांकि, आदेश जारी होने के बाद बढ़ते विरोध को देखते हुए तत्कालीन महापौर एजाज ढेबर ने इसे वापस ले लिया था। एक बार फिर उसी तरह का निर्णय सामने आने से लोगों में नाराजगी बढ़ गई है।

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