IPS अरुणदेव गौतम Success Story: किसान परिवार से निकलकर बने छत्तीसगढ़ के पूर्णकालिक DGP, जानिए संघर्ष से सफलता तक का सफर
IPS Arun Dev Gautam Success Story: किसान परिवार से निकलकर संघर्ष और मेहनत के दम पर छत्तीसगढ़ के पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) बने IPS अरुणदेव गौतम की प्रेरणादायक सफलता की कहानी जानिए। पढ़ें उनके करियर, उपलब्धियों और सफर की पूरी जानकारी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 1992 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अरुणदेव गौतम को राज्य का पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त किया है। गृह विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह द्वारा जारी आदेश के बाद उनकी नियुक्ति पर औपचारिक मुहर लग गई। इससे पहले वे करीब 17 महीने तक प्रभारी डीजीपी के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा गठित पैनल की अनुशंसा के बाद राज्य सरकार ने उन्हें पूर्णकालिक डीजीपी का दायित्व सौंपा। अपनी सख्त कार्यशैली, प्रभावी नेतृत्व और अपराध नियंत्रण के लिए पहचान रखने वाले अरुणदेव गौतम अब राज्य की कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
किसान परिवार से शुरू हुआ संघर्ष
अरुणदेव गौतम का जन्म 2 जुलाई 1967 को उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के अभयपुर गांव में एक किसान परिवार में हुआ। शुरुआती शिक्षा उन्होंने गांव के सरकारी स्कूल से आठवीं तक पूरी की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए प्रयागराज पहुंचे, जहां राजकीय इंटर कॉलेज से दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई पूरी की।
उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक (बीए) और राजनीति विज्ञान में एमए किया। इसके बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), नई दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय कानून में एमफिल और पीएचडी की उपाधि हासिल की।
पहली असफलता के बाद नहीं मानी हार
यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में अरुणदेव गौतम को पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी तैयारी जारी रखी और दूसरे प्रयास में सफलता हासिल कर वर्ष 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी बने। उनका यह सफर आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है।
मध्य प्रदेश से शुरू हुआ प्रशासनिक करियर
12 अक्टूबर 1992 को आईपीएस सेवा जॉइन करने के बाद उन्हें मध्य प्रदेश कैडर आवंटित हुआ। प्रशिक्षु आईपीएस के रूप में जबलपुर में सेवाएं देने के बाद वे बिलासपुर में सीएसपी, कवर्धा में एसडीओपी, भोपाल में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और 23वीं बटालियन के कमांडेंट रहे। राजगढ़ जिले में उन्होंने पहली बार पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
छत्तीसगढ़ में निभाईं कई अहम जिम्मेदारियां
वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ कैडर चुना। इसके बाद कोरिया, रायगढ़, जशपुर, राजनांदगांव, सरगुजा और बिलासपुर जैसे महत्वपूर्ण जिलों में एसपी के रूप में कार्य किया।
डीआईजी बनने के बाद उन्होंने पुलिस मुख्यालय, सीआईडी, वित्त एवं योजना, प्रशासन और मुख्यमंत्री सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2009 में राजनांदगांव नक्सली हमले के बाद उन्हें वहां का एसपी बनाया गया, जहां उन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रभावी नेतृत्व का परिचय दिया।
बाद में वे छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के प्रभारी, बिलासपुर रेंज के आईजी और बस्तर आईजी भी रहे। झीरम घाटी नक्सली हमले के बाद बस्तर में सुरक्षा व्यवस्था संभालते हुए उन्होंने विधानसभा चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अब संभालेंगे छत्तीसगढ़ पुलिस की कमान
लगभग 17 महीने तक प्रभारी डीजीपी रहने के बाद अब अरुणदेव गौतम को राज्य का पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक बनाया गया है। उनसे राज्य में अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने, आधुनिक पुलिसिंग को बढ़ावा देने तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की उम्मीद की जा रही है।
अरुणदेव गौतम की सफलता से सीख
अरुणदेव गौतम की कहानी बताती है कि साधारण परिवार से निकलकर भी मेहनत, शिक्षा, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के दम पर देश की सर्वोच्च सेवाओं तक पहुंचा जा सकता है। पहली असफलता के बावजूद हार न मानने का उनका जज्बा आज यूपीएससी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
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