Raipur Traffic News: DCP डॉ. अर्चना झा ने स्कूल प्राचार्यों को दिए सख्त निर्देश, नाबालिग ड्राइविंग पर होगी कार्रवाई
Raipur Traffic News: यातायात पुलिस उपायुक्त (DCP) डॉ. अर्चना झा ने स्कूल प्राचार्यों की बैठक लेकर नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही स्कूल बसों में सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
रायपुर। पुलिस उपायुक्त (यातायात) डॉ. अर्चना झा ने पदभार ग्रहण करते ही सड़क सुरक्षा और विद्यार्थियों की सुरक्षित आवाजाही को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जिले के लगभग 70 विद्यालयों के प्राचार्यों की बैठक आयोजित की। बैठक में नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने पर प्रभावी रोक लगाने, स्कूल बसों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने तथा सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (यातायात) विवेक शुक्ला, सहायक पुलिस आयुक्त (यातायात) गुरजीत सिंह, सुरेन्द्र साय, सीमा अहिरवार सहित विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्य उपस्थित रहे।
नाबालिगों के वाहन चलाने पर होगी सख्त कार्रवाई
बैठक को संबोधित करते हुए डीसीपी ट्रैफिक डॉ. अर्चना झा ने कहा कि नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना न केवल उनके लिए बल्कि अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए भी गंभीर खतरा है। उन्होंने सभी विद्यालयों को निर्देशित किया कि विद्यार्थियों को नियमित रूप से सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाए तथा दुर्घटनाओं से जुड़े जागरूकता वीडियो दिखाकर यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक अभिभावक-शिक्षक बैठक (PTM) में अभिभावकों को स्पष्ट रूप से समझाया जाए कि वे किसी भी परिस्थिति में अपने नाबालिग बच्चों को दोपहिया या चारपहिया वाहन चलाने की अनुमति न दें।
अभिभावकों पर भी होगी कानूनी कार्रवाई
डीसीपी ट्रैफिक ने बताया कि यदि कोई अभिभावक या वाहन स्वामी नाबालिग को वाहन चलाने की अनुमति देता है, तो मोटर वाहन अधिनियम के तहत उसके विरुद्ध ₹25,000 तक का जुर्माना, छह माह तक का कारावास तथा अन्य वैधानिक कार्रवाई का प्रावधान है।
स्कूल बसों में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य
बैठक में स्कूल बसों की सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई। सभी विद्यालयों को निर्देश दिए गए कि स्कूल बसों के संचालन संबंधी सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए।
साथ ही प्रत्येक स्कूल बस का हर माह कम से कम एक बार मैकेनिकल निरीक्षण कराया जाए। बस चालकों और परिचालकों का नियमित नेत्र परीक्षण एवं स्वास्थ्य परीक्षण भी कराने के निर्देश दिए गए, ताकि किसी भी संभावित तकनीकी या स्वास्थ्य संबंधी समस्या का समय रहते समाधान किया जा सके।
पुलिस, स्कूल और अभिभावकों के समन्वय पर जोर
डॉ. अर्चना झा ने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए पुलिस, विद्यालय प्रबंधन तथा अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। सभी संबंधित पक्षों की सक्रिय भागीदारी से ही सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है और बच्चों के लिए सुरक्षित यातायात वातावरण तैयार किया जा सकता है।
बैठक के अंत में सहायक पुलिस आयुक्त सीमा अहिरवार ने सभी प्राचार्यों का आभार व्यक्त किया। विद्यालयों के प्राचार्यों ने स्कूल स्तर पर सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाने, नाबालिगों द्वारा वाहन संचालन पर प्रभावी रोक लगाने तथा स्कूल बसों में निर्धारित सभी सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया।
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