CG Doctors News: डॉक्टरों को भारी पड़ रहा शपथ पत्र, इस्तीफे का दे रहे नोटिस

CG Doctors News: सरकारी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज का कोई भी डॉक्टर सेवा नहीं दे रहा है। यह शपथपत्र भारी पड़ रहा है। यही कारण है कि प्रदेश के कई सरकारी मेडिकल कॉलेजाें में संविदा डॉक्टर इस्तीफे का नोटिस दे रहे हैं।

Nov 12, 2024 - 11:30
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CG Doctors News: डॉक्टरों को भारी पड़ रहा शपथ पत्र, इस्तीफे का दे रहे नोटिस

CG Doctors News: डीकेएस सुपर स्पेशलिटी समेत दूसरे मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टराें के नौकरी छोड़ने के लिए एनपीए नहीं, शपथपत्र जिम्मेदार है। स्वास्थ्य विभाग का एक आदेश चिकित्सा शिक्षा विभाग के डॉक्टरों पर भारी पड़ रहा है। दरअसल स्वास्थ्य विभाग ने एक आदेश जारी कर आयुष्मान भारत में पंजीकृत सभी निजी अस्पतालों को एक शपथपत्र भरने कहा है। इसमें अस्पतालों को यह लिखना होगा कि उनके अस्पताल में सरकारी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज का कोई भी डॉक्टर सेवा नहीं दे रहा है। यह शपथपत्र भारी पड़ रहा है। यही कारण है कि प्रदेश के कई सरकारी मेडिकल कॉलेजाें में संविदा डॉक्टर इस्तीफे का नोटिस दे रहे हैं।

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डीकेएस में यूरो सर्जरी के दो डॉक्टरों ने इस्तीफे दिए हैं। दुर्ग में भी 6 एचओडी समेत 5 से ज्यादा फैकल्टी ने इस्तीफे दिए हैं। राजनांदगांव में तो सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी कॉलेज प्रबंधन को दी गई है। यही नहीं रायगढ़ में भी चार सीनियर फैकल्टी नौकरी छोड़ रहे हैं। इस्तीफे देने वालों में ज्यादातर संविदा डॉक्टर हैं। ये संविदा डॉक्टर एनएमसी की नजरों में रेगुलर डॉक्टरों के समान है। बस सेवा शर्तें व कुछ सुविधाओं में अंतर है। यही कारण है कि कॉलेजों की मान्यता में रेगुलर के साथ संविदा डॉक्टरों का महत्व एक समान है।

प्रदेशभर में इस्तीफे के बीच मचे घमासान के बीच चिकित्सा शिक्षा विभाग भी अलर्ट मोड पर आ गया है। पत्रिका की पड़ताल में पता चला है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग के एक अधिकारी दुर्ग में डॉक्टरों के इस्तीफे पर यहां तक कह गए कि इस्तीफा देने दो, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। हालांकि बाद में ये अधिकारी वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से डॉक्टरों से मनुहार करते नजर आए।

एनपीए का विवाद भी कम नहीं, कह रहे घर में प्रेक्टिस करें डॉ.

आंबेडकर अस्पताल के डॉक्टर नॉन प्रेक्टिस अलाउंस यानी एनपीए के विवाद में हलाकान हो रहे हैं। यही कारण है कुछ डॉक्टर नौकरी छोड़ने का मन बना रहे हैं। कई सीनियर डॉक्टर निजी अस्पतालों के शपथपत्र को लेकर परेशान दिखे। उनका कहना है कि एनपीए लेने व छोड़ने का विकल्प हर साल मिलना चाहिए। अभी प्रमोशन के समय यह विकल्प दिया जाता है। जबकि मध्यप्रदेश में हर साल डॉक्टरों को यह विकल्प दिया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के आदेश के बाद कोई भी सरकारी या प्राइवेट डॉक्टर घर से प्रेक्टिस नहीं कर सकता। न्यूरो सर्जन, कार्डियक सर्जन, जनरल सर्जन, ऑर्थोपीडिक सर्जन, ईएनटी या नेत्र रोग विशेषज्ञ घर में मरीजों की सर्जरी नहीं कर सकते। इसके लिए सेटअप की जरूरत होती है, जो निजी अस्पतालों में है।

डीकेएस में क्या होगा किडनी ट्रांसप्लांट का

डीकेएस में दो यूरो सर्जन के इस्तीफे के बाद किडनी ट्रांसप्लांट की योजना धक्का लग सकता है। प्रदेश में केवल डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट की पूरी संभावना है। शपथपत्र के आदेश के बाद डॉक्टर लगातार नौकरी छोड़ रहे हैं। यहां एक नेफ्रोलॉजिस्ट है, जो संविदा में है। उन्होंने इस्तीफे का कोई नोटिस तो नहीं दिया है, लेकिन शपथपत्र वाले मामले में वे कम अस्पताल छोड़कर चले जाए, कहा नहीं जा सकता। ऐसे में एम्स के बाद डीकेएस में किडनी ट्रांसप्लांट की संभावनाएं धूमिल दिख रही हैं।

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