Patrika Raksha Kavach Abhiyan: सोशल मीडिया पर सतर्क रहने की जरूरत, ठगी के साथ कर रहे ब्लैकमेल भी…
Patrika Raksha Kavach Abhiyan: इन दिनों लोगों को सोशल मीडिया पर बेहद ही सतर्क रहने की जरूरत है। लगातार फर्जी अकाउंट बना रहे आरोपी ठगी के साथ ब्लैकमेल भी करने लगे हैं।
Patrika Raksha Kavach Abhiyan: सिम्स बिलासपुर में मेडिसिन विभाग की एक पीजी छात्रा के साथ विभाग के एचओडी डॉ. पंकज टेंभुर्नीकर द्वारा प्रताड़ित करना व धमकियां देने का मामला चर्चा में है। एचओडी के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो गई है। राजधानी स्थित पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में भी पहले ऐसे मामले आए हैं। हालांकि ऐसे एचओडी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
Patrika Raksha Kavach Abhiyan: मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा
यहां पीड़ित पक्ष छात्र व छात्राएं भी रहे। कॉलेज में विशाखा कमेटी भी बनी है, जो मामलों की पेंडेंसी खत्म करने में असफल है। प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में विशाखा समिति बनी है, जो महिलाओं से जुड़ी समस्याओं व शिकायतों पर सुनवाई कर निर्णय लेती है। नेहरू मेडिकल कॉलेज में पीजी छात्र के साथ गालीगलौज व हो या कॉलर पकड़ना, मामला सुर्खियों में रहा। 2024 में एक महिला एचओडी पर एक छात्रा को जानबूझकर फेल करने का आरोप लगा। छात्रा डिप्रेशन में चली गई थी।
वहीं, एक अन्य विभाग में भी जानबूझकर फेल करने का मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा और हैल्थ साइंस विवि को दोबारा परीक्षा करानी पड़ी। एक अन्य विभाग में भी एचओडी पर धमकी देने व निजी काम कराने का आरोप लगा। मामला स्वास्थ्य मंत्री तक भी पहुंचा। वहां से मामले की जांच का आदेश हुआ। फिर इस मामले में अचानक मोड़ आ गया और छात्रों ने दबाव में डीन को लिखकर दे दिया कि उन्होंने एचओडी के खिलाफ कोई पत्र नहीं लिखा है। इसके बाद मामले का पटाक्षेप हो गया।
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एचओडी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं
Patrika Raksha Kavach Abhiyan: हालांकि कुछ छात्रों ने प्रबंधन के दबाव में पत्र नहीं लिखने की बात स्वीकारी थी। सिम्स की छात्रा द्वारा डीन डॉ. रमनेश मूर्ति को लिखे तीन पत्र पत्रिका के पास है। इसमें छात्रा ने डॉ. टेंभुर्नीकर पर इको रूप में आए दिन अनुचित तरीके से छूने का भी आरोप लगाया गया है। साथ ही जानबूझकर मोबाइल फोन तोड़ देना, ड्यूटी के दौरान गाली देना, मोबाइल टूटने के नाम पर हर वार्ड में पीछा करने का आरोप है।
छात्रा ने पत्र में ये भी कहा है कि एचओडी के शत्रुतापूर्ण व्यवहार से उन्हें काम करना मुश्किल हो गया है। मानसिक व शारीरिक रूप से थकने की बात भी पत्र में कही गई है। गौर करने वाली बात ये है कि 9 फरवरी की शिकायत के बाद भी सिम्स प्रबंधन ने एचओडी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। एक तरह से मामले का दबाने का प्रयास किया गया।
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