अहिवारा नगर पालिका में अध्यक्ष और सीएमओ के बीच लगातार विवाद सामने आ रहे हैं। कार्यों और अधिकारों को लेकर अब लड़ाई सार्वजनिक हो गई है। ताजा मामला बिजली बिल के भुगतान को लेकर सामने आया है। इसमें अहिवारा के पालिका अध्यक्ष विद्यानंद कुशवाहा का आरोप है कि सीएमओ अंकुर पांडेय ने बिना परिषद को सूचना दिए करोड़ों रुपए के बिल का भुगतान कर दिया। जबकि सीएमओ का कहना है कि उन्होंने शासन के निर्देशानुसार ही बिजली बिल का भुगतान किया है। जानिए कैसे शुरू हुआ विवाद
बताया जा रहा है कि अहिवारा पालिका में करीब 2 करोड़ 68 लाख रुपए की राशि आई है। आरोप है कि इसी टैक्स की राशि में से अहिवारा पालिका के सीएमओ ने करीब डेढ़ करोड़ के बिजली बिल बकाया का भुगतान कर दिया है। इसको लेकर पालिका अध्यक्ष विद्यानंद कुशवाहा और सीएमओ अंकुर पांडेय के बीच जमकर बहस हुई। पालिका अध्यक्ष ने कहा कि सीएमओ केवल 50 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक की राशि का भुगतान करने का अधिकार है, लेकिन सीएमओ ने अपने अधिकार से 111 गुना ज्यादा की राशि का भुगतान बिना परिषद को जानकारी दिए बगैर कर दिया। पालिका अध्यक्ष का कहना है बिजली बिल पटाने का कोई विरोध नहीं है, लेकिन परिषद में आनी चाहिए थी यह बात। एक साल से नहीं पटा बिजली बिल
पालिका अध्यक्ष व पार्षदों ने आरोप लगाया है कि सीएमओ अंकुर पांडेय करीब एक साल से हैं, लेकिन एक भी बार उन्होंने बिजली बिल का भुगतान नहीं किया है। जबकि बिजली बिल का भुगतान पालिका में जमा ब्याज की राशि से किया जा सकता है। ब्याज की राशि हर महीने करीब 3 लाख रुपए मिलती है। जबकि जनता से मिले टैक्स के पैसे से मूलभूत व अन्य विकास कार्यों से किए जाते हैं। लेकिन सीएमओ ने टैक्स की राशि बिना परिषद सभा में लाए ही खर्च कर दी। इसकी जानकारी पालिका अध्यक्ष तक को नहीं दी गई। जनप्रतिनिधियों की अनदेखी, मनमर्जी का आरोप
अहिवारा पालिका में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष समेत अन्य पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि सीएमओ लगातार जनप्रतिनिधियों की अनदेखी कर रहे हैं। पालिका अध्यक्ष ने कहा कि बिना परिषद को सूचना दिए भुगतान के संबंध में जब सीएमओ से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा अधिकार है। जबकि उनके पास जनता के पैसों के इस तरह मनमर्जी खर्च या भुगतान करने का अधिकार नहीं है। वे केवल 50 हजार से एक लाख तक ही भुगतान कर सकते हैं। इस मामले में पालिका अध्यक्ष ने कहा कि वे कोर्ट जाएंगे और लीगल नोटिस जारी करेंगे। सीएमओ बोले - मैंने शासन के निर्देश का पालन किया
इस पूरे मामले में सीएमओ अंकुर पांडेय का कहना है कि शासन द्वारा निर्देश मिला था कि बिजली बिल पटाना है। इसमें किसी भी प्रकार के अनुमोदन की जरूरत नहीं होती है। जो काम करवाना होता है उसमें अनुमोदन लगता है। जिस काम में वित्तीय स्वीकृति लेनी होती है उसमें अनुमोदन लेना पड़ता है। बिजली बिल का भुगतान करने में किसी भी प्रकार के अनुमोदन की जरूरत नहीं होती। शासन का ये निर्देश भी है कि एकल हस्ताक्षर से सीएमओ भुगतान कर सकता है। पालिका अध्यक्ष का आरोप : भ्रष्टाचार में फंसे, इसलिए खाली कर रहे पालिका का एकाउंट
वहीं पालिका अध्यक्ष विद्यानंद कुशवाहा ने आरोप लगाते हुए कहा कि सीएमओ के भ्रष्टाचार की शिकायत हुई है, इसलिए वो पालिका का पैसा खत्म कर के जाने की योजना बना रहे हैं। घूस मांगने के मामले में सीएमओ को थाने में जाकर अपनी आवाज चेक करवानी चाहिए। वो इधर-उधर भाग रहे हैं, लेकिन अपनी आवाज की जांच नहीं करवा रहे हैं। उन्हें वायरल ऑडियो और बहस की आवाज को थाने में जाकर इसकी जांच करवानी चाहिए।