PG Medical Admission: PG मेडिकल प्रवेश नियमों पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 200 एडमिशन रद्द होने का खतरा

PG Medical Admission: हाईकोर्ट ने PG प्रवेश नियम 2025 में स्टेट कोटे के तहत 50 फीसदी ओपन कैटेगरी को गलत ठहराते हुए नियम 11(ए) और (बी) के अंश हटाए हैं।

Jan 20, 2026 - 11:53
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PG Medical Admission: PG मेडिकल प्रवेश नियमों पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 200 एडमिशन रद्द होने का खतरा

PG Medical Admission: क्या प्रदेश के सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों में हुए एमडी-एमएस कोर्स में दो राउंड में हुए 200 छात्रों के एडमिशन रद्द किए जाएंगे? हाईकोर्ट के 16 जनवरी को हुए आदेश से तो यही लगता है। हाईकोर्ट ने पैराग्राफ 21 के अंश: और राज्य छत्तीसगढ़ चिकित्सा स्नातकोत्तर प्रवेश नियम 2025 के नियम 11(ए) और (बी) में उल्लिखित श्रेणियों से संबंधित उम्मीदवारों के बीच भेदभाव नहीं करेगा को हटा दिया है।

PG Medical Admission: दो राउंड की काउंसिलिंग पूरी हो चुकी

इसमें स्टेट कोटे में 50 फीसदी सीटें ओपन कैटेगरी में रखी गई है, जिस पर सबसे ज्यादा विवाद हो रहा है। इस साल पीजी में प्रवेश की अंतिम तिथि 31 जनवरी है। अगर प्रवेश रद्द किया जाता है तो 11 दिनों में चार राउंड की काउंसिलिंग पूरी करना आसान नहीं है। ऐसे में कई सीटें लैप्स होने की आशंका भी है। प्रदेश में पीजी की 593 सीटें और दो राउंड की काउंसिलिंग पूरी हो चुकी है।

प्रदेश के लिए यह झटका है कि दो राउंड की काउंसिलिंग पूरी होने के बाद प्रवेश रद्द करना पड़ सकता है। दरअसल, ओपन कैटेगरी में बाहरी छात्रों के प्रवेश के कारण स्थानीय छात्रों का बड़ा नुकसान हुआ है। पहले राउंड में 14 आवंटित में केवल 2 छात्रों ने प्रवेश लिया था। वहीं, दूसरे राउंड की मेरिट सूची में 56 बाहरी छात्रों के नाम थे, जिनमें केवल दो को सीटों का आवंटन किया गया था।

पत्रिका पहले ही इस बात का अंदेशा जता चुका है कि दूसरे राज्यों के ऐसे छात्र, जिन्होंने छत्तीसगढ़ से एमबीबीएस नहीं किया है, वे प्रवेश लेने से बिदक रहे हैं। हमने पहले प्रकाशित खबरों में बताया है कि ये हाईकोर्ट में चल रहे केस के कारण हो रहा है। हाईकोर्ट बाहरी छात्रों के खिलाफ आदेश दे सकता है। पत्रिका की आशंका सही साबित हुई।

दरअसल, पत्रिका इस आधार पर खबरों का प्रकाशन करता रहा कि देश के किसी भी राज्य में स्टेट कोटे में ओपन कैटेगरी नहीं होता। इस आधार पर संभावना थी, बाहरी छात्रों के हित में कोई आदेश आने से रहा। ऑल इंडिया कोटे के लिए सरकारी कॉलेजों में 50 फीसदी सीटें पहले से आरक्षित हैं। वहीं, निजी कॉलेजों में 42.5-42.5 फीसदी सीटें स्टेट और मैनेजमेंट व 15 फीसदी सीटें एनआरआई कोटे के लिए रिजर्व हैं। एक दिसंबर के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार निजी कॉलेजों में भी स्टेट कोटे में बाहर से पढ़े छात्रों को प्रवेश देने का नियम था।

22 नवंबर को स्थगित किया गया था रजिस्ट्रेशन

PG Medical Admission: हाईकोर्ट के आदेश के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 22 नवंबर को पीजी में एडमिशन के लिए चल रही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को निरस्त कर दिया था। तब 24 नवंबर तक रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख थी। बीच में ही प्रक्रिया स्थगित करने से नीट पीजी क्वालिफाइड छात्र परेशान हो रहे थे।

दरअसल एक छात्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 100 फीसदी स्थानीय आरक्षण को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने छात्रा के पक्ष में फैसला दिया था। इस कारण ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया स्थगित करनी पड़ी। राज्य शासन ने पीजी प्रवेश नियम में हैल्थ साइंस विवि से अध्ययनरत छात्रों को पीजी में प्रवेश देने का नियम बनाया था।

पीजी प्रवेश नियम में गड़बड़झाला इस तरह

पहले इंस्टीट्शनल डोमिसाल था, जिसमें प्रदेश में एमबीबीएस पढ़े छात्रों को ही पीजी कोर्स में एडमिशन में प्राथमिकता दी जाती थी।

यही नहीं, प्रदेश के मूल निवासी छात्रों, जिन्होंने दूसरे राज्यों से एमबीबीएस किया है, उन्हें बची हुई सीटों में प्राथमिकता दी जाती थी।

1 दिसंबर के गजट नोटिफिकेशन में स्टेट कोटे को दो भागों में बांट दिया गया। इसमें 50-50 फीसदी सीटें स्टेट व बाहरी छात्रों के लिए कर दिया गया। स्टेट ओपन कोटे को लेकर ही मामला कोर्ट में चल रहा था।

मैनेजमेंट कोटे की सीटों पर बाहरी छात्रों को प्रवेश देने का नियम पहले से है, जो अब भी जारी रहेगा।

हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन किया जा रहा है। इस आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। जो भी हो, जल्द छात्रों को अवगत कराया जाएगा- रितेश अग्रवाल, कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन

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