Bank Strike: शनिवार अवकाश की मांग तेज, 27 जनवरी को 8 लाख बैंककर्मी करेंगे हड़ताल
Bank Strike: देशभर के सार्वजनिक, निजी, विदेशी, क्षेत्रीय ग्रामीण एवं सहकारी बैंकों में कार्यरत करीब आठ लाख बैंक अधिकारी और कर्मचारी 27 जनवरी 2026 को अखिल भारतीय बैंक हड़ताल पर रहेंगे। इस हड़ताल का आह्वान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने किया है, जो बैंकिंग सेक्टर की नौ प्रमुख यूनियनों का संयुक्त संगठन है। […]
Bank Strike: देशभर के सार्वजनिक, निजी, विदेशी, क्षेत्रीय ग्रामीण एवं सहकारी बैंकों में कार्यरत करीब आठ लाख बैंक अधिकारी और कर्मचारी 27 जनवरी 2026 को अखिल भारतीय बैंक हड़ताल पर रहेंगे। इस हड़ताल का आह्वान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने किया है, जो बैंकिंग सेक्टर की नौ प्रमुख यूनियनों का संयुक्त संगठन है।
Bank Strike: शनिवार अवकाश की मांग
इस संबंध में अखिल भारतीय बैंक अधिकारी महासंघ के सचिव वाई. गोपालकृष्णा और छत्तीसगढ़ बैंक एम्प्लॉयिज एसोसिएशन के महासचिव शिरीष नलगुंडवार ने गुरुवार को प्रेसवार्ता कर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में हुए 10वें द्विपक्षीय समझौते के दौरान आईबीए और केंद्र सरकार के बीच यह सहमति बनी थी कि हर माह के दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश रहेगा, जबकि शेष शनिवार कार्यदिवस होंगे।
उस समय यह आश्वासन भी दिया गया था कि सभी शनिवार को अवकाश घोषित करने की मांग पर भविष्य में विचार किया जाएगा, लेकिन अब तक इस मुद्दे पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इसी के विरोध में बैंक कर्मियों ने गुरुवार शाम एकजुटता दिखाते हुए रैली भी निकाली।
केवल बैंकों में लागू नहीं है पांच दिवसीय कार्य प्रणाली
छत्तीसगढ़ इकाई इंडियन नेशनल बैंक कांग्रेस के महासचिव बलजीत सिंह ने बताया कि वित्तीय संस्थान आप कोई भी ले लें, जिसमें RBI, LIC, GIC हो, वह राज्य सरकार हो या फिर भारत सरकार हो। इन सभी जगह पर सप्ताह में पांच दिवसीय बैंकिंग प्रणाली लागू है। केवल बैंक में ही पांच दिवसीय सप्ताह में बैंकिंग प्रणाली लागू नहीं हुई है।
कर्मचारियों पर बढ़ता कार्यभार, भर्ती की मांग तेज
नेताओं ने बताया कि देशभर में कार्यरत लगभग 8 लाख बैंक कर्मचारी और अधिकारी सीमित संसाधनों के बावजूद पूरी निष्ठा से सेवाएं दे रहे हैं। बैंकिंग कर्मियों के योगदान से ही भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना है। स्टाफ की स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के बैंकों में औसतन 400 ग्राहकों पर एक कर्मचारी होता है, जबकि सार्वजनिक बैंकों में यह आंकड़ा करीब 2000 ग्राहकों पर एक कर्मचारी तक पहुंच चुका है।
इसी कारण यूनियनों ने बैंकों में व्यापक स्तर पर नई भर्तियां किए जाने की भी मांग की है।
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