मोबाइल और शराब की लत से बच्चे व युवा हो रहे फैटी लिवर के शिकार, पेरेंट्स की बढ़ी चिंता, जाने बचने के उपाय

रायपुर।सबसे चिंता की बात ये है कि आंबेडकर समेत किसी भी सरकारी अस्पताल में लिवर की जांच करने की मशीन ही नहीं है।

Feb 20, 2026 - 10:43
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मोबाइल और शराब की लत से बच्चे व युवा हो रहे फैटी लिवर के शिकार, पेरेंट्स की बढ़ी चिंता, जाने बचने के उपाय

रायपुर। बच्चों व युवाओं में फैटी लिवर की बीमारी कॉमन होती जा रही है। इससे पैरेंट्स की चिंता बढ़ गई है। पहले यह बीमारी 40 प्लस या इससे ज्यादा उम्र के लोगों को होती थी। अब यह 12 से 21 साल के छात्रों को भी हो रही है।

यह बीमारी अब केवल शराब पीने वालों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूली बच्चों, युवाओं व सामान्य लोगों में भी तेजी से बढ़ रही है। सबसे चिंता की बात ये है कि आंबेडकर समेत किसी भी सरकारी अस्पताल में लिवर की जांच करने की मशीन ही नहीं है। ब्लड जांच या सोनोग्राफी जांच से बीमारी का पता लगाया जा रहा है।

डॉक्टरों के अनुसार बच्चों व युवाओं में इस बीमारी का प्रमुख कारण मोबाइल फोन पर एक जगह बैठकर ज्यादा समय बिताना, जंक फूड व ऑइली खाना है।

केस-1: 14 वर्षीय छात्र को अपच व पैर में हल्की सूजन के बाद एक निजी अस्पताल में दिखाया गया। लक्षण के अनुसार पेट की सोनोग्राफी कराई गई। रिपोर्ट चौंकाने वाली थी। लिवर के आसपास फैट जमा हुआ था। डॉक्टरों ने इस बीमारी को फैटी लिवर बताया। डॉक्टरों ने पेरेंट्स को बच्चे को जंक फूड व मोबाइल फोन से दूर रहने कहा है।

केस-2: 21 वर्षीय कॉलेज के छात्र का वजन बाकी छात्रों की तुलना में ज्यादा था। वीडियो गेम व मोबाइल फोन पर ज्यादा व्यस्त रहना इन्हें भारी पड़ गया। छात्र के पेट में पानी भरने की गंभीर समस्या आने लगी। हिस्ट्री में पता चला कि वह दोस्तों के साथ आए दिन शराब का भी सेवन करता है। परिजन नियमित दवाइयां खिला रहे हैं।आउटडोर गेम कम होना, फिजिकल एक्टीविटीज कम होना व वजन सामान्य से ज्यादा होना भी प्रमुख वजह है।

आंबेडकर, समेत निजी अस्पतालों के पीडियाट्रिक्स व मेडिसिन विभाग में रोजाना ऐसे 250 से ज्यादा मरीजों का इलाज किया जा रहा है, जिन्हें जांच में फैटी लिवर की पुष्टि होती है। इनका इलाज लंबा चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार जरूरी डाइट व दवा से कई मरीजों की बीमारी ठीक भी हो रही है।

वहीं लापरवाही बरतने वालों को बार-बार अस्पताल आने की जरूरत पड़ रही है। डॉक्टर पैरेंट््स से बच्चों को डाइट, फिजिकल एक्टीविटीज पर फोकस करने को कह रहे हैं। फैटी लिवर की बीमारी केवल मोटे लोगों तक सीमित नहीं है। जिनके पेट के आसपास फैट जमा होता है, उन्हें भी यह रिस्क हो सकता है। देश के 2023 के हैल्थ सर्वे में 17 फीसदी बच्चों का वजन सामान्य से ज्यादा था।

यानी वे मोटापा का शिकार थे। अगले 5-6 साल में मोटापे से ग्रसित बच्चों की संख्या 22 से 25 फीसदी पहुंचने की संभावना है। यह ङ्क्षचताजनक है।फैटी लिवर से बचने के उपाय और लक्षण लिवर में फैट 10 फीसदी से ज्यादा हो जाए तो यह स्वस्थ नहीं होता। डॉक्टर से इलाज कराएं।

गर्दन के पीछे काले निशान, कॉलर साइज 17, गर्दन पर काली धारियां व हाथ-पैरों में सूजन तो अलर्ट हो जाएं। वजन कम करें। फल, सब्जियां, साबुत अनाज या प्रोटीन लें। शराब सेवन बिल्कुल न करें। अगर करते हैं तो बंद कर दें। रोजाना 30 मिनट से एक घंटे पैदल चलें डायबिटीज व कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करें।

टॉपिक एक्सपर्ट

मोटापा व कुपोषण के कारण बच्चों व युवाओं में फैटी लिवर के केस बढ़ रहे हैं। शराब सेवन, आइली व जंक फूड भी लिवर के दुश्मन है। मोबाइल फोन या टीवी के सामने लंबे समय तक न बैठे रहे। आउटडोर गेम भी खेलें। ओपीडी में 10 से 15 मरीज फैटी लिवर के आ रहे हैं, जो ङ्क्षचताजनक है।

डॉ. योगेंद्र मल्होत्रा, प्रोफेसर मेडिसिन आंबेडकर अस्पतालफैटी लिवर का फेफड़ों पर बुरा असर पड़ सकता है। इससे फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी आ सकती है। यह सूजन पैदा कर सकता है, जिससे सांस लेने में समस्या हो सकती है। फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा होना व क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) जैसी बीमारी हो सकती है।डॉ. आरके पंडा, एचओडी रेस्पिरेटरी मेडिसिन आंबेडकर अस्पताल

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