Terror of Dog: शहर में खूंखारों का आतंक, बच्चे हो रहे शिकार, दो साल में भी नहीं बना डॉग शेल्टर
Terror of Dog: शहर के गली-मोहल्लों और कॉलोनियों में आवारा खूंखारों से खतरा है। देवेंद्रनगर के साईंनगर बस्ती की एक बच्ची जान पर बन आई। श्वानों के हमले से 10-12 साल की बच्ची घायल हुई है।
Terror of Dog: निगम क्षेत्र में श्वानों के आतंक से पूरा शहर हलाकान है। बच्चे लगातार डाग बाइट का शिकार हो रहे हैं। इसके बावजूद निगम के जिम्मेदारों को कोई फर्क पड़ता नजर नहीं आ रहा है। सोनडोंगरी में लाखों रुपए की लागत से डॉग शेल्टर हाउस का निर्माण तक पूरा नहीं हो पाया, जिससे कि ऐसे खूंखार श्वानों को हटाया जा सके।
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शहर के गली-मोहल्लों और कॉलोनियों में आवारा खूंखारों से खतरा है। देवेंद्रनगर के साईंनगर बस्ती की एक बच्ची जान पर बन आई। श्वानों के हमले से 10-12 साल की बच्ची घायल हुई है। इससे पहले भी शहर में कई दिल दहला देने वाली घटनाएं हो चुकी हैं। हैरानी ये कि पुख्ता इंतजाम करने के बजाय जैसे ही इस तरह की कोई घटना होती है, तो निगम प्रशासन श्वानों के बधियाकरण का गुणगान करने में लग जाता है। जबकि ऐसे खूंखारों को शेल्टर हाउस में रखा जाना था, परंतु जिम्मेदारों के उदासीन रवैए के कारण सोनडोंगरी में दो साल बाद भी शेल्टर हाउस का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है।
दावा ऐसा कि कोई समस्या नहीं
श्वानों के हमले से बच्चे के घायल हो जाने पर बुधवार को निगम प्रशासन यह बताने की कोशिश करता रहा है कि साल 2024 में निगम क्षेत्र में 5035 कुत्तों का बधियाकरण कराया किया गया। सोनडोंगरी में शेल्टर हाउस का भी संचालन जल्दी होगा। तब जाकर डॉग बाइट की संख्या में कमी आने की संभावना है। यह तर्क भी देने में जिम्मेदार पीछे नहीं कि जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड एवं सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) की स्थापना की गई है। निगम में स्वास्थ्य अधिकारी तृप्ति पाणिग्रही के अनुसार शिकायत के आधार पर डॉग केचिंग की कार्रवाई की जाती है।
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