Majdoor Diwas: पिता के पसीने ने दिखाया रास्ता, मां के संघर्ष ने दी ताकत.. पढ़ें 2 जुझारू युवाओं की कहानी

Majdoor diwas: राजधानी की दो संघर्षशील जिंदगियां लोकेश कुमार जांगड़े और संजुलता प्रधान इस बात की मिसाल हैं कि जब हौसला मजबूत हो, तो कोई भी मुश्किल मंजिल नहीं रह जाती

May 1, 2025 - 19:10
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Majdoor Diwas: पिता के पसीने ने दिखाया रास्ता, मां के संघर्ष ने दी ताकत.. पढ़ें 2 जुझारू युवाओं की कहानी

ताबीर हुसैन. मजदूर दिवस (Majdoor Diwas) सिर्फ मेहनतकश हाथों का समान नहीं, बल्कि उन सपनों की भी पहचान है जो तंगहाली की जमीन पर भी बुलंद इरादों के साथ उगते हैं। राजधानी की दो संघर्षशील जिंदगियां लोकेश कुमार जांगड़े और संजुलता प्रधान इस बात की मिसाल हैं कि जब हौसला मजबूत हो, तो कोई भी मुश्किल मंजिल नहीं रह जाती। इनकी कहानियां मजदूर दिवस पर श्रम का नहीं, उस श्रम से उपजी उम्मीद, स्वाभिमान और सफलता की सच्ची तस्वीरें हैं। दोनों युवाओं का कहना है पिता के पसीने ने रास्ता दिखाया और मां के संघर्ष ने हमें सीना तानने की ताकत दी। इन कहानियों में सिर्फ संघर्ष नहीं, वो संकल्प है जो समाज की दिशा बदलने की ताकत रखता है। मजदूर दिवस पर इन्हीं मजबूत इरादों को सलाम।

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लोकेश अपने माता पिता के साथ

Majdoor Diwas: खेती नहीं थी, लेकिन सपनों की जमीन उपजाऊ थी

लोकेश के पिता हमाली करते थे और मां आंगनबाड़ी केंद्र में खाना बनाती थीं। घर में न खेत था, न आमदनी का कोई स्थायी जरिया, लेकिन लोकेश के सपनों की जमीन बेहद उपजाऊ थी। उन्होंने गांव के सरकारी स्कूल से 12वीं तक पढ़ाई की। फिर रायपुर आकर हॉस्टल में रहते हुए बीएससी किया। अखबारों में सर्वे किया, फैक्ट्री में सुपरवाइजर बने और रात में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हुए दिन में रविवि से एम.लाइब की पढ़ाई पूरी की। नेट और जेआरएफ क्वालिफाई किया। आज वे राजीव लोचन शासकीय पीजी कॉलेज में लाइब्रेरियन पद पर कार्यरत हैं।

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संजुलता प्रधान अपने माता पिता के साथ

सिंगल मदर संजुलता ने किया डबल एमबीए

संजुलता प्रधान का जीवन तमाम सामाजिक और आर्थिक बंधनों के बावजूद आत्मनिर्भरता की मिसाल है। उनके माता-पिता अलेखराम और गौरीबाई दूसरे के खेतों में मजदूरी करते थे। स्कूल के दिनों में संजुलता 10वीं की परीक्षा में फेल हो गईं। जल्दी शादी हो गई और पढ़ाई बीच में छूट गई। लेकिन जब जिमेदारियां बढ़ीं और पति के निधन के बाद अकेले बच्चों की परवरिश करनी पड़ी, तो उन्होंने दोबारा किताबें उठाईं। बड़े बेटे के नर्सरी स्कूल जाने के साथ-साथ संजुलता ने खुद बीएससी नर्सिंग शुरू किया। फिर एमबीए (एचआर मैनेजमेंट और हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन) में डबल डिग्री ली और अब ई-कॉमर्स और हेल्थ सेक्टर में काम कर रही हैं।

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