बलरामपुर-रामानुजगंज: पत्तों से दोना-पत्तल बनाकर आत्मनिर्भरता की राह पर कुसमी की महिलाएं
स्थानीय होटलों, दुकानों और हाट-बाजारों में इन महिलाओं के बनाए दोने हाथों-हाथ बिक जाते हैं। इनकी कीमत कम होने और पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण मांग लगातार बढ़ रही है।
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