प्रसंगवश: मार्च 2026 तक सफाए की डेडलाइन और संघर्ष विराम का झांसा

देश को माओवाद-नक्सलवाद से मुक्त कराने के ऑपरेशन को मिल रही सफलता

Nov 7, 2025 - 07:33
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प्रसंगवश: मार्च 2026 तक सफाए की डेडलाइन और संघर्ष विराम का झांसा

केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ सहित देश को माओवाद और नक्सलवाद के दंश से मुक्त करने की दिशा में जोर-शोर से लगी हुई है। केंद्र सरकार के इस बड़े ऑपरेशन में छत्तीसगढ़ सहित वे सभी राज्य, जो माओवादी-नक्सलवादी हिंसा से प्रभावित हैं, पूरे दम-खम से साथ दे रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर नियंत्रण के बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने देश की दूसरी सबसे बड़ी समस्या माओवाद-नक्सलवाद पर ध्यान केंद्रित किया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ सहित भारत से माओवाद-नक्सलवाद के सफाए की डेडलाइन मार्च 2026 तय कर दी। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वय से रणनीति बनाकर प्रभावित राज्यों में ऑपरेशन लॉन्च किए गए। साथ ही नक्सलियों से हथियार डालने और मुख्यधारा में लौट आने की अपील भी की गई। जिन नक्सलियों ने समाज की मुख्यधारा से जुडऩे का निर्णय लिया, उनके पुनर्वास और रोजगार के लिए सरकार ने भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए और नियद नेल्लानार जैसी कई योजनाएं चलाकर नक्सलियों से हथियार डलवाए। जो लाल आतंक का रास्ता छोडऩे के लिए तैयार नहीं हुए, उनके खिलाफ एक के बाद एक लगातार ऑपरेशन्स चलाए जा रहे हैं। नक्सलवाद के सफाए के लिए सरकार कितनी दृढ़ता से खड़ी है, इसका पता इस बात से चलता है कि पहली बार बारिश के मौसम में भी लगातार नक्सल ऑपरेशन चलाए गए। इस दौरान नक्सलियों के टॉप लीडर्स को टारगेट किया गया। एक के बाद एक टॉप नक्सल लीडर्स का मुठभेड़ में सफाया किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि टॉप 17 नक्सल लीडर में से 2-4 ही बचे हैं, जो भागे-भागे फिर रहे हैं। वर्तमान नवंबर माह को मिला लें तो सफाए की डेडलाइन के 5 माह ही बचे हैं। छत्तीसगढ़ में नक्सल ऑपरेशन्स को जबर्दस्त सफलता मिल रही है। नक्सलगढ़ का इलाका सिमटता चला जा रहा है। इस बीच, नक्सलियों की तेलंगाना स्टेट कमेटी ने 6 माह का एकतरफा संघर्ष विराम का पांसा फेंका है। वहीं, महाराष्ट्र और ओडिशा की नक्सल इकाइयां भी इसी तरह के युद्धविराम या बातचीत के रास्ते पर विचार कर रही हैं। इसे बचे-खुचे नक्सलियों की चाल मान जा रहा है। नक्सली अबतक इस तरह के भी एंबुश लगाने में माहिर रहे हैं, लेकिन सरकार भी उनकी ऐसी चालों को समझ चुकी है और उनके झांसे में नहीं आ रही है। अब उम्मीद की जा रही है कि 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ सहित देश माओवाद-नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा। –अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com

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