Baswahi holi: अनहोनी से बचने यहां के लोगों ने 8 दिन पहले ही मना ली होली, जमकर उड़े रंग-गुलाल

Baswahi holi: कोरिया जिले के बसवाही गांव के लोगों ने दशकों पुरानी परंपरा का किया निर्वहन, मांदर की थाप और फाग गीतों के बीच लोगों ने जमकर उड़ाए रंग-गुलाल

Feb 25, 2026 - 07:41
 0  10
Baswahi holi: अनहोनी से बचने यहां के लोगों ने 8 दिन पहले ही मना ली होली, जमकर उड़े रंग-गुलाल

बैकुंठपुर. कोरिया जिले के वनांचल ब्लॉक सोनहत के ग्राम बसवाही गांव में अनहोनी से बचने 8 दिन पहले होली मनाई गई। सोमवार को गांव की गलियों में मांदर की थाप और फाग गीतों (Baswahi holi) के बीच बच्चेे सहित बुजुर्ग जमकर रंग-गुलाल उड़ाए। 8 दिन पहले होली मनाने को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि गांव में अनहोनी और दैवीय प्रकोप से बचने हर साल ऐसा किया जाता है।

होली के विशेष आयोजन (Baswahi holi) में पूरा गांव एक रंग में रंगा नजर आया। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी फाग गीतों की धुन पर नाचते-गाते दिखे। पारंपरिक वाद्य यंत्र मांदर की थाप ने उत्सव के उत्साह को दोगुना कर दिया। ग्रामीणों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर बधाई दी।

Baswahi village holi
Sang faag song by villagers (Photo source- Patrika)

बसवाही गांव के युवाओं और बुजुर्गों का कहना है कि समय से पहले होली मनाने को लेकर कोई नया बदलाव नहीं है, बल्कि दशकों पुरानी परंपरा है। यहां कैलेंडर की तय तिथि से ठीक 8 दिन पहले सम्मत होलिका दहन करते हैं। फिर उसके अगले दिन पूरे गांव में होली (Baswahi holi) खेली जाती है।

हम अपने पूर्वजों की स्थापित इस परंपरा का पालन पूरी निष्ठा से करते आ रहे हैं। गौरतलब है कि देश-प्रदेश में 3 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को होली (Baswahi holi) खेली जाएगी। जबकि सोनहत विकासखंड के ग्राम पंचायत बसवाही में समय से पहले हर्षोल्लास के साथ होली का त्योहार मनाया है।

Baswahi holi: होली पहले मनाए जाने की यह है वजह

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में अनहोनी और दैवीय प्रकोप से बचने (Baswahi holi) के लिए समय से पहले होली मनाते हैं। इस परंपरा के पीछे गहरी धार्मिक आस्था और भय दोनों जुड़े हैं। उनका मानना है कि यदि तय समय से पहले होली नहीं मनाई गई तो गांव के देवी-देवता नाराज हो सकते हैं।

Baswahi holi
Faag song (Photo- Patrika)

पूर्वजों की मान्यता है कि ऐसा न करने पर गांव में कोई बड़ी विपदा या प्राकृतिक आपदा आने का डर बना रहता है। गांव की सुख-शांति और खुशहाली के लिए ही इस दशकों पुरानी परंपरा को जीवित रखा गया है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

PoliceDost Police and Public Relations