गर्भावस्था में वेतन, ओवरटाइम का दोगुना पैसा और न्यूनतम मजदूरी… क्या घरेलू कामगार जानते हैं अपने अधिकार?
Domestic Workers Day 2026: घरेलू कामगार दिवस पर विशेषज्ञों ने कहा कि घरेलू कामगार असंगठित क्षेत्र की बड़ी श्रमशक्ति होने के बावजूद अपने अधिकारों से अब भी वंचित हैं। कानून में प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका क्रियान्वयन कमजोर है, जिससे उन्हें पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा।
Domestic Workers Day: सुबह से देर शाम तक दूसरों के घरों को संभालने वाले घरेलू कामगारों की जिंदगी जिम्मेदारियों से भरी होती है, लेकिन उनके अधिकारों की जानकारी अब भी सीमित है। खाना बनाने, सफाई करने और बच्चों-बुजुर्गों की देखभाल जैसे कार्यों में लगे ये कामगार असंगठित क्षेत्र की सबसे बड़ी श्रमशक्ति हैं। बावजूद इसके, श्रम कानूनों में मिले संरक्षण का लाभ सभी तक नहीं पहुंच पा रहा।
घरेलू कामगार दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ की कुछ महिलाओं से बात चित कर सुबह से देर शाम तक दूसरों के घरों को संभालने वाले घरेलू कामगारों कीसे उनका अनुभव और क्या क्या परिस्तिथि का सामना करना पड़ता है उस पर चर्चा की गई है। “कानून में अधिकार मौजूद हैं, लेकिन जमीन पर उनकी पहुंच अब भी कमजोर है।”
Domestic Workers Day Special: असंगठित क्षेत्र में सबसे बड़ा योगदान, फिर भी सबसे कम सुरक्षा
देश के नए श्रम ढांचे में घरेलू कामगारों को असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की श्रेणी में रखा गया है। कोड ऑन वेजेज 2019 और सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 जैसे प्रावधानों के तहत न्यूनतम मजदूरी, समय पर वेतन भुगतान और ओवरटाइम के बदले अतिरिक्त भुगतान का प्रावधान किया गया है। श्रम विशेषज्ञ सीए चेतन तरवानी के मुताबिक, “यदि किसी कामगार से तय समय से अधिक काम लिया जाता है तो उसे ओवरटाइम का अतिरिक्त भुगतान मिलना चाहिए। इसी तरह वेतन भी तय समय सीमा में देना अनिवार्य है।”
मातृत्व लाभ और ओवरटाइम: कानून में स्पष्ट प्रावधान
नए श्रम कानूनों में गर्भवती महिलाओं के लिए भी विशेष सुरक्षा दी गई है। मातृत्व अवकाश के तहत 6 महीने तक वेतन सहित छुट्टी का प्रावधान शामिल है। वहीं मासिक वेतन पाने वाले श्रमिकों को अगले महीने की निर्धारित समय-सीमा में भुगतान मिलना चाहिए। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रावधानों की जानकारी जमीनी स्तर पर बेहद कम है, जिससे घरेलू कामगार अपने अधिकारों का उपयोग नहीं कर पाते।
“हमें कभी किसी ने नहीं बताया हमारे भी अधिकार हैं” – घरेलू कामगार
रायपुर में पिछले 12 वर्षों से घरेलू काम कर रहीं सुनीता यादव कहती हैं,“हम सुबह से रात तक कई घरों में काम करते हैं, लेकिन कभी किसी ने यह नहीं बताया कि हमें भी ओवरटाइम या छुट्टी का अधिकार है। अगर कोई दिन काम नहीं करें तो उसी दिन की मजदूरी कट जाती है।” वहीं एक अन्य कामगार रेखा साहू बताती हैं,“वेतन तय नहीं होता, हर घर अलग-अलग पैसे देता है। अगर बीमार पड़ जाएं तो काम भी छूट जाता है और पैसा भी।”

जागरूकता ही सबसे बड़ा समाधान
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू कामगारों के सामने सबसे बड़ी समस्या कानून की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि जानकारी की कमी है। सीए चेतन तरवानी कहते हैं, “घरेलू कामगार दिवस केवल सम्मान का दिन नहीं होना चाहिए, बल्कि यह जागरूकता का अवसर भी है। जब तक कामगार अपने अधिकारों को नहीं जानेंगे, तब तक कानून का लाभ पूरी तरह नहीं मिल पाएगा।”

सम्मान से आगे बढ़कर अधिकारों की ओर कदम
घरेलू कामगार आज भी शहरों की अनदेखी रीढ़ हैं। वे घरों को चलाते हैं, लेकिन उनके अपने जीवन में स्थिरता और सुरक्षा की कमी बनी रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय आ गया है जब केवल सम्मान नहीं, बल्कि अधिकारों की वास्तविक पहुंच सुनिश्चित की जाए। घरेलू कामगार दिवस इसी संदेश को दोहराता है-कि जो दूसरों के घर रोशन करते हैं, उनके अपने जीवन में भी अधिकारों की रोशनी पहुंचनी चाहिए।
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