Wash & Wash Scam: ब्लैक करेंसी को असली नोट में बदलने का झांसा, अंतर्राज्यीय गिरोह के 7 आरोपी गिरफ्तार
Wash & Wash Scam: ब्लैक करेंसी को केमिकल प्रक्रिया से असली नोट में बदलने का झांसा देकर ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। मामले में 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने गिरोह से जुड़े कई अहम साक्ष्य भी बरामद किए हैं।
Raipur Crime News: रायपुर पुलिस ने Wash & Wash / Black Currency Scam के जरिए करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देशन में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा थाना तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के 7 आरोपियों को पुणे के खंडाला स्थित एक रिसॉर्ट से गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी लोगों को कम समय में रकम दोगुनी करने और काले रंग के नोटों को विशेष केमिकल व विदेशी तकनीक की मदद से असली भारतीय मुद्रा में बदलने का झांसा देकर ठगी करते थे। आरोपियों के कब्जे से 4 करोड़ रुपये से अधिक की नगदी, 17 मोबाइल फोन, नोट के आकार के काले पेपर, कांच की प्लेट्स, अन्य सामग्री और दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
रायपुर में 1.13 करोड़ रुपये की ठगी
मामला थाना तेलीबांधा में दर्ज अपराध क्रमांक 330/26, धारा 318(4), 61(2) बीएनएस से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने रायपुर के एक व्यक्ति को अपना शिकार बनाकर करीब 1.13 करोड़ रुपये की ठगी की थी।
प्रकरण में पुलिस ने पहले नागपुर से दो महिला आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उनसे पूछताछ और जब्त मोबाइल फोन की डिजिटल जांच के बाद गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई।
मोबाइल चैट और डिजिटल साक्ष्यों से पुणे तक पहुंची पुलिस
गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन में मौजूद चैट, संपर्क नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का तकनीकी विश्लेषण किया गया। इससे पुलिस को गिरोह के सदस्यों के आपसी संपर्क और उनकी भूमिका के संबंध में अहम सुराग मिले।
इन सुरागों के आधार पर आरोपियों को पुणे में लोकेट किया गया। इसके बाद रायपुर पुलिस की संयुक्त टीम पुणे रवाना हुई और करीब एक सप्ताह तक आरोपियों की गतिविधियों तथा संभावित ठिकानों पर निगरानी रखी।
खंडाला के रिसॉर्ट में करोड़ों की ठगी करते पकड़े गए
पुलिस टीम को सूचना मिली कि आरोपी पुणे के खंडाला स्थित एक रिसॉर्ट में एक व्यक्ति को रकम दोगुनी करने का झांसा देकर बुला रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, वाराणसी निवासी पीड़ित करोड़ों रुपये लेकर रिसॉर्ट पहुंचा था और आरोपियों को रकम सौंप चुका था। इसी दौरान पुलिस ने मौके पर कार्रवाई करते हुए 7 आरोपियों को ठगी की रकम लेते हुए गिरफ्तार किया।
सभी आरोपियों को पुणे से ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाया गया।
2005 से सक्रिय गिरोह, 100 से ज्यादा लोगों को बनाया निशाना
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि यह गिरोह कथित तौर पर वर्ष 2005 से सक्रिय है। आरोपियों ने छत्तीसगढ़, नोएडा, पुणे, बड़ौदा, उदयपुर, दिल्ली सहित देश के विभिन्न शहरों और राज्यों में इसी तरह की वारदातें करना बताया है।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह ने अब तक 100 से अधिक लोगों से अरबों रुपये की ठगी किए जाने की जानकारी सामने आई है। गिरोह ऐसे लोगों को निशाना बनाता था, जिन्हें कम समय में बड़ी रकम हासिल करने या अपनी रकम दोगुनी करने का लालच दिया जाता था।
खुद को बड़े लोगों से जुड़ा बताकर बनाते थे प्रभाव
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी पीड़ितों पर प्रभाव जमाने के लिए खुद को प्रभावशाली व्यक्तियों और विदेशी निवेशकों से जुड़ा बताते थे। वे कथित तौर पर बड़े नेताओं और फिल्मी कलाकारों के साथ अपनी तस्वीरें दिखाकर विश्वास हासिल करने का प्रयास करते थे।
पीड़ितों को दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, हैदराबाद, हरियाणा, आगरा, राजस्थान, गुजरात और नागपुर सहित अलग-अलग शहरों के फाइव स्टार होटलों में बुलाया जाता था।
गिरोह के कुछ प्रमुख सदस्य अपने साथ निजी गनमैन भी रखते थे, ताकि पीड़ितों पर प्रभाव और दबाव बनाया जा सके।
कैसे करते थे Wash & Wash Black Currency Scam?
पुलिस के अनुसार, आरोपी पहले पीड़ित को यह विश्वास दिलाते थे कि विशेष केमिकल और विदेशी तकनीक की मदद से काले रंग से ढके नोटों को असली भारतीय मुद्रा में बदला जा सकता है।
इसके लिए आरोपियों द्वारा पहले से तैयार असली नोटों का इस्तेमाल कर नकली रासायनिक प्रक्रिया का प्रदर्शन किया जाता था। इस प्रक्रिया से पीड़ित को यह विश्वास दिलाया जाता था कि काले नोट वास्तव में असली मुद्रा में परिवर्तित हो रहे हैं।
इसके बाद विदेशी केमिकल, हाई-पावर केमिकल, विदेशी परीक्षण, वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति, फंड रिलीज और अन्य कथित औपचारिकताओं के नाम पर पीड़ित से कई किश्तों में बड़ी रकम ली जाती थी।
रकम हासिल करने के बाद आरोपी योजनाबद्ध तरीके से फरार हो जाते थे या अन्य बहानों से पीड़ित को गुमराह कर ठगी की राशि हड़प लेते थे।
गिरोह के मुख्य सरगना कौन?
पुलिस के मुताबिक, ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन/शेट्टी/रेड्डी और मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर गिरोह के प्रमुख सदस्य हैं।
आरोपी प्रवीण कुमार श्रीवास्तव गिरोह में “कैप्टन” की भूमिका निभाता था, जबकि मनोज कुमार श्रीवास्तव को “बड़े सर” के नाम से संबोधित किया जाता था। गिरोह के अन्य सदस्यों को भी अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं और ठगी से प्राप्त रकम का कथित तौर पर प्रतिशत के आधार पर बंटवारा किया जाता था।
पुलिस के अनुसार, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव और मनोज कुमार श्रीवास्तव पूर्व में भी ठगी के मामलों में मुंबई एवं वाराणसी में जेल जा चुके हैं।
पहले दो महिला आरोपी हो चुकी हैं गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस ने इससे पहले नागपुर, महाराष्ट्र से दो महिला आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें कनिज फातमा उर्फ भावना पांडेय और दीपिका पॉलीवाल शामिल हैं।
उनके कब्जे से तीन मोबाइल फोन, 26 हजार रुपये नगद, एटीएम कार्ड एवं आधार कार्ड सहित करीब 70 हजार रुपये की सामग्री जब्त की गई थी। इस तरह मामले में अब तक कुल 9 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
पुलिस के मुताबिक, मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
4 करोड़ से अधिक नगदी सहित यह सामान जब्त
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से:
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4 करोड़ रुपये से अधिक नगद
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17 मोबाइल फोन
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नोट के आकार के काले पेपर
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कांच की प्लेट्स
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ठगी में इस्तेमाल की जाने वाली अन्य सामग्री
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महत्वपूर्ण दस्तावेज
बरामद किए हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की सूची
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ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी, उम्र 46 वर्ष, निवासी गुड़गांव, हरियाणा; वर्तमान पता नालासोपारा, मुंबई।
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प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन उर्फ शेट्टी उर्फ रेड्डी, उम्र 52 वर्ष, निवासी वाराणसी, उत्तर प्रदेश।
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मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर, उम्र 55 वर्ष, निवासी वाराणसी, उत्तर प्रदेश।
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विवेक सिंह, उम्र 48 वर्ष, निवासी वाराणसी, उत्तर प्रदेश।
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शुभम पांडेय, उम्र 37 वर्ष, निवासी जौनपुर, उत्तर प्रदेश; वर्तमान पता मुंबई।
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योगेन्द्र चौहान, उम्र 48 वर्ष, निवासी जौनपुर, उत्तर प्रदेश।
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बालमुकुंद दीक्षित, उम्र 40 वर्ष, निवासी जौनपुर, उत्तर प्रदेश।
पुलिस की कार्रवाई जारी
रायपुर पुलिस ने इस मामले में तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल इनपुट और लगातार निगरानी के आधार पर अंतर्राज्यीय गिरोह तक पहुंच बनाई। मामले में फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है और गिरोह से जुड़े अन्य ठगी के मामलों की भी जांच की जा रही है।
नोट: आरोपियों के संबंध में ऊपर दी गई कई बातें पुलिस जांच/पूछताछ में सामने आई जानकारी पर आधारित हैं। अंतिम सत्यता न्यायिक प्रक्रिया में निर्धारित होगी।
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