निगम ने प्रस्ताव लौटाया तो पार्षद ने कहा- मेरा इस्तीफा ले लीजिए | पानी-सफाई नहीं दे सकता तो पार्षद क्यों बना
नगर निगम की बैठक में प्रस्ताव लौटाए जाने पर पार्षद ने नाराज़गी जताते हुए इस्तीफ़ा देने की पेशकश की। कहा- जब जनता को पानी और सफाई की मूलभूत सुविधा ही नहीं दे सकता, तो पार्षद बने रहने का क्या औचित्य है।
Raipur News : रायपुर उत्तर विधानसभा क्षेत्र के वार्डों की बैठक के दौरान वीरांगना अवंति बाई वार्ड के भाजपा पार्षद खगपति सोनी ने विधायक - पुरंदर मिश्रा के सामने इस्तीफा देने की पेशकश कर दी। उन्होंने खुले तौर पर कहा कि यदि पार्षद होकर मैं अपने वार्ड में काम नहीं कर सकता, लोगों को पानी, सफाई जैसी मूलभूत सुविधा नहीं दे सकता तो मेरे पार्षद रहने का कोई मतलब नहीं है।
दरअसल, नगर निगम ने उनके वार्ड में जर्जर हो चुकी पाइपलाइन को बदलने का एक प्रस्ताव रेलवे क्षेत्र में काम नहीं होने का हवाला देकर वापस भेज दिया। यही नहीं, विधानसभा क्षेत्र के बाकी पार्षदों ने भी अपने-अपने वार्ड की समस्याएं गिनाई।
रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा ने महापौर मीनल चौबे, सभापति सूर्यकांत राठौर और निगम कमिश्नर विश्वदीप की मौजूदगी में जोन-2, 3 और 4 में आने वाले वार्ड पार्षदों की बैठक ली। इस दौरान पार्षदों ने कई व्यावहारिक दिक्कतें बताई। बैठक के दौरान जब पार्षद खगपति सोनी ने इस्तीफे की पेशकश की तो विधायक भी स्तब्ध हो गए।
वजह पूछने पर पार्षद ने बताया कि उनके वार्ड में बड़ा हिस्सा रेलवे का है। यह नगर निगम सीमा में है। यहां 2004 में
पाइपलाइन डाली गई थी। इससे लोगों के घरों में पानी पहुंचता है। अब यह पाइपलाइन इतनी जर्जर हो गई है कि कई जगह लीकेज की स्थिति है।
इसे बदलने के लिए जोन में प्रस्ताव दिया गया था। जोन ने इसे यह कहकर लौटा दिया कि रेलवे क्षेत्र में काम नहीं कर सकते। जबकि एक दूसरे वार्ड का बड़ा हिस्सा रेलवे क्षेत्र में आता है, वहां काम हो गया और मेरे क्षेत्र में नहीं हो सकता, यह कैसे संभव है। पार्षद इस्तीफे पर अड़ गए थे। इस बीच सभापति सूर्यकांत ने मामले को संभालने की कोशिश की और पार्षद को शांत किया। इधर, विधायक पुरंदर मिश्रा ने पार्षदों की दिक्कतों को सुनने के बाद हर वार्ड को विधायक मद से 10-10 लाख रुपए देने की घोषणा की। साथ ही महापौर मीनल चौबे ने भी हर वार्ड को पांच लाख रुपए महापौर निधि से देने की घोषणा की।
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