CM साय और स्पीकर ने निकाली ‘शेर की दहाड़’, RSS प्रचारक इंद्रेश बोले- यह दहाड़ लाहौर और ढाका तक पहुंचनी चाहिए
Chhattisgarh News: आपातकाल स्मृति दिवस कार्यक्रम में सीएम साय और विधानसभा अध्यक्ष की मौजूदगी में आरएसएस प्रचारक इंद्रेश कुमार ने एक अनूठा खेल खिलाते हुए सभी से शेर की दहाड़ निकलवाई..
Emergency Remembrance Day: आपातकाल स्मृति दिवस पर लोकतंत्र सेनानियों के लिए रायपुर में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की मौजूदगी में आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने एक अनूठा खेल खिलाते हुए सभी से शेर की दहाड़ निकलवाई। उन्होंने राष्ट्रभक्ति का संदेश देते हुए कहा कि यह दहाड़ लाहौर और ढाका तक पहुंचनी चाहिए। हम लायक भारतीय हैं और हमारा खोया हुआ जन व जमीन वापस आना चाहिए। इस दौरान लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने सहित कई वरिष्ठ जन उपस्थित रहे।
Chhattisgarh News: लोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
इस दौरान उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष पर आधारित स्मारिका आपातकाल के योद्धा का विमोचन किया तथा आपातकाल पर आधारित निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया। सीएम ने कहा, लोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है। मुख्यमंत्री ने कहा, आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह कालखंड है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल स्मरण नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को सचेत करना है ताकि वे समझ सकें कि स्वतंत्रता और लोकतंत्र कितनी बड़ी कुर्बानियों के बाद प्राप्त हुए हैं। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि कहा कि 1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती था। आपातकाल हमें लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सदैव सजग रहने की प्रेरणा देता है। इस दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष कैलाश सोनी सहित अन्य मौजूद थे।
भारत की सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों ने हमेशा समाज को जोड़ा: इंद्रेश कुमार
Chhattisgarh News: कार्यक्रम के मुख्य वक्ता आरएसएस के प्रचारक इंद्रेश कुमार ने कहा कि लोकतंत्र केवल शासन प्रणाली नहीं, बल्कि एक जीवन मूल्य है, जिसे समझने और निभाने की जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक की है। उन्होंने आपातकाल के दौर को याद करते हुए कहा कि यह समय भारतीय लोकतंत्र के लिए एक कठिन परीक्षा का काल था, जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़ा। उन्होंने कहा कि इतिहास को याद रखना केवल अतीत को जानना नहीं है, बल्कि उससे सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों ने हमेशा समाज को जोड़ने का कार्य किया है और इन्हीं मूल्यों के आधार पर देश- दुनिया में अपनी पहचान को और मजबूत कर सकता है।

निबंध प्रतियोगिता में इन्हें मिला पुरस्कार
कार्यक्रम के दौरान आपातकाल स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। इसमें जेआर दानी गर्ल्स स्कूल रायपुर की जागृति जांगड़े ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। विवेकानंद विद्यापीठ कोरबा के सूरज तांडिया को द्वितीय तथा अग्रसेन इंटरनेशनल स्कूल, दुर्ग के अंश देशमुख तृतीय स्थान पर रहे। वहीं, महाविद्यालय स्तर पर रायपुर कल्याणी पटले प्रथम, रायगढ़ की सीमा साव द्वितीय तथा दुर्ग की खुशबू तृतीय स्थान पर रहीं।
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