रायपुर पुलिस की बड़ी सफलता: ट्रायल मॉनिटरिंग से NDPS मामलों में रिकॉर्ड दोषसिद्धि
Raipur Police News: रायपुर पुलिस कमिश्नरेट की प्रभावी ट्रायल मॉनिटरिंग, साक्षियों की समयबद्ध पेशी और बेल जंपरों की गिरफ्तारी के चलते एनडीपीएस मामलों में रिकॉर्ड दोषसिद्धि हासिल हुई है। न्यायालय, अभियोजन और पुलिस के समन्वित प्रयासों से उल्लेखनीय सफलता मिली।
Raipur News : मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ एनडीपीएस (NDPS) मामलों में समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रायपुर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा विकसित विशेष ट्रायल मॉनिटरिंग सिस्टम ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। न्यायालय, अभियोजन और पुलिस के समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 2026 में अब तक 128 एनडीपीएस प्रकरणों में दोषसिद्धि हुई है, जबकि 198 आरोपियों को न्यायालय द्वारा दंडित किया गया है।
पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देशन में संचालित इस पहल को "समन से सजा तक" अभियान के रूप में प्रभावी ढंग से लागू किया गया, जिसका उद्देश्य लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण और दोषियों को समयबद्ध सजा सुनिश्चित करना था।
सजा का वर्गीकरण
वर्ष 2026 में अब तक एनडीपीएस अधिनियम के तहत प्राप्त दोषसिद्धियों का विवरण इस प्रकार है—
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10 वर्ष से कम की सजा – 71 प्रकरणों में 92 आरोपी
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10 वर्ष की सजा – 23 प्रकरणों में 37 आरोपी
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10 वर्ष से अधिक की sजा – 34 प्रकरणों में 69 आरोपी
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कुल दोषसिद्धि – 128 प्रकरणों में 198 आरोपी
जोनवार ट्रायल मॉनिटरिंग व्यवस्था
एनडीपीएस मामलों की सुनवाई को गति देने के लिए कमिश्नरेट स्तर पर विशेष मॉनिटरिंग तंत्र स्थापित किया गया। इसके अंतर्गत मध्य, पश्चिम और उत्तर जोन में ट्रायल मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी संबंधित डीसीपी और उनके पर्यवेक्षण में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्तों को सौंपी गई।
अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त तारकेश्वर पटेल, राहुल देव शर्मा और आकाश मरकाम के नेतृत्व में जोनवार समीक्षा प्रणाली विकसित की गई, जिससे प्रत्येक मामले की नियमित निगरानी सुनिश्चित हो सकी।
एसीपी दीपक मिश्रा को बनाया गया नोडल अधिकारी
एनडीपीएस मामलों की समग्र ट्रायल मॉनिटरिंग और समन्वय के लिए एसीपी कोतवाली दीपक मिश्रा को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया। उनके नेतृत्व में विशेष न्यायालयों के स्टाफ, अभियोजन अधिकारियों और कोर्ट मोहर्रिरों के साथ नियमित समन्वय स्थापित किया गया।
न्यायालयों से जारी समन और वारंट की जानकारी तत्काल संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जाती रही तथा उनकी तामिली की सतत समीक्षा की गई।
साक्षियों की समयबद्ध उपस्थिति से मिली गति
प्रत्येक मामले के साक्षियों की सूची तैयार कर यह सुनिश्चित किया गया कि निर्धारित तिथियों पर आवश्यक गवाह न्यायालय में उपस्थित रहें। समन और वारंट की समयबद्ध तामिली, साक्षियों से सतत संपर्क तथा अभियोजन पक्ष के साथ बेहतर समन्वय के चलते कई लंबित मामलों का विचारण तेजी से पूरा हो सका।
साथ ही विशेष न्यायालयों द्वारा नियमित और प्रभावी सुनवाई किए जाने से साक्ष्य लेखन और अंतिम निर्णय की प्रक्रिया भी समयबद्ध रूप से संपन्न हुई।
फरार बेल जंपरों के खिलाफ विशेष अभियान
ट्रायल मॉनिटरिंग के दौरान यह सामने आया कि कई गंभीर एनडीपीएस मामले केवल इसलिए लंबित थे क्योंकि आरोपी जमानत मिलने के बाद न्यायालय में उपस्थित नहीं हो रहे थे।
इसके बाद पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर विशेष टीमों का गठन किया गया। इन टीमों ने उत्तर प्रदेश, झारखंड, ओडिशा और मध्यप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में दबिश देकर फरार बेल जंपरों और स्थायी वारंटधारी आरोपियों को गिरफ्तार किया। स्थानीय पुलिस के सहयोग से न्यायालयीन आदेशों का प्रभावी पालन भी सुनिश्चित कराया गया।
न्यायपालिका, अभियोजन और पुलिस के समन्वय का सफल मॉडल
रायपुर पुलिस द्वारा विकसित यह ट्रायल मॉनिटरिंग मॉडल न्यायालय, अभियोजन और पुलिस के बीच प्रभावी समन्वय का एक सफल उदाहरण बनकर उभरा है। इस पहल ने न केवल लंबित मामलों के त्वरित निराकरण में मदद की है, बल्कि दोषियों को समयबद्ध दंड दिलाकर समाज में नशे के खिलाफ एक सशक्त संदेश भी दिया है।
रायपुर पुलिस ने कहा है कि भविष्य में भी माननीय न्यायालयों और अभियोजन विभाग के साथ समन्वय बनाए रखते हुए एनडीपीएस मामलों की सतत मॉनिटरिंग और प्रभावी कार्रवाई जारी रखी जाएगी।
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